You are here
Home > Article > सेना के प्रयासों से शीतल देवी के सपनों को मिले नए पंख।

सेना के प्रयासों से शीतल देवी के सपनों को मिले नए पंख।

Sheetal Devi from Kishtwar

सेना के  प्रयासों से शीतल देवी के सपनों को मिले नए पंख।

क्रत्रिम अंग लगाने के लिए हुई बैंगलूरू रवाना। अनुपम खेर फाऊंडैशन मदद के लिए आगे आया।




किश्तवाड़ (मनीषा मनु) : राष्ट्र सर्वोपरि और स्वयं से पहले सेवा की अटूट विचारधारा पर चलने वाली भारतीय सेना ना केवल सीमा प्रहरी बनकर देश और देशवासियों की रक्षा करते हैं। ब्लकि सीमाओं के भीतर भी आम लोगों की सहायता और उत्थान के लिए भी हमेशा आगे आते रहते हैं। जि़ला किश्तवाड़ जैसे आतंकवाद ग्रस्त और संवेदनशील इलाके में सेना ने आतंकियों का सफाया करने के साथ साथ विकास कार्यों और सामाजिक सुधार में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आम नागरिकों की सहायता और जीवन सुधार कार्यों की कढी को आगे बढाते हुए सेना , एक 14 साल की दिव्यांग किशोरी को क्रत्रिम अंग लगाने के लिए बैंगलूरू भेजने में सफल हुई है।

किश्तवाड़ जिले के लोईदार इलाके की गुणमढ़ गांव की रहने वाली शीतल देवी बचपन से ही फोकोमेलिया नामक बिमारी से ग्रसित है। इस बिमारी के कारण उनकी दोनों बाजू अविकसित रह गई। लेकिन शीतल देवी ने हिम्मत नहीं हारी और पांवों की उंगलियों से लिखने का प्रयास करने लगी। पांवों की उंगलियों से ही पढ़ने लिखने व अन्य कार्यों में दक्षता हासिल की। शीतल देवी के हौंसलों और पढाई के प्रति रूचि को देखते हुए भारतीय सेना की आर आर 11 बटालियन ने सितंबर 2019 से पढ़ने लिखने में सहायता देना शुरू किया था। इसके साथ ही आर आर 11 शीतल देवी को क्रत्रिम अंग लगवाने के लिए भी प्रयत्नशील थी। इन्हीं प्रयत्नों को आगे बढाते हुए सेना ने अनुपम खेर फाऊंडैशन के साथ भी संपर्क साधा और अनुपम खैर फाऊंडैशन शीतल देवी की सहायता के लिए आगे आया। 1 जुलाई के दैनिक सवेरा अंक में भी शीतल देवी के हौंसलो की कहानी छपी थी।

 


इसके बाद शीतल देवी की कहानी एक बार फिर मीडिया प्लेटफार्म पर छा गई। 4 जुलाई को आर आर 11 की सहायता से शीतल देवी अपने माता पिता के साथ इलाज के लिए बैंगलूरू रवाना हुई। हैल्थ कैयर ग्लोबल हास्पिटल बैंगलूरू में प्राथमिक चिकित्सा शुरू हुई है। इस खबर के बाद शीतल देवी के परिवार के साथ ही पूरी पंचायत लोईदार में खुशी की लहर दौड़ गई है। लोईदार के लोगों ने सेना का धन्यवाद प्रकट करते हुए कहा कि अब शीतल आम लडकियों की तरह दोनों हाथों से सभी काम कर पाएगी। शीतल देवी आगे पढ़ना चाहती है और शिक्षिका बनना चाहती है। अब शीतल के ख्वाबों को नए पंख मिल रहे हैं , निसंदेह ऊंची उडान के साथ एक नया जीवन उसका इंतजार कर रहा है।

Similar Articles

Top